क्रिकेट आज भारत ही नही बल्कि लगभग हर देश में लोकप्रिय होता जा रहा है। भारत से भी क्रिकेट में महान खिलाड़ी हुए है और होते आ रहे है , मंसूर अली खान पटौदी, कपिल देव,सुनील गावस्कर ,सचिन तेंदुलकर ,राहुल द्रविड़,महेंद्र सिंह धोनी से लेकर विराट कोहली और रोहित शर्मा तक अनेक महान खिलाड़ी है जिन्होंने क्रिकेट में भारत का नाम हमेशा ऊंचा किया है । लेकिन क्या आपको पता है इस खेल की शुरुआत भारत में कब से हुई है और कैसे भारत ने इस खेल में विश्व की सर्वश्रेष्ठ टीम तक का सफर तय किया आइये जानते है।
जैसा कि सभी जानते है 200 साल तक भारत पर ब्रिटिश शासन था इसी दौरान क्रिकेट भारत में खेला गया ,18 वीं सदी में यूरोपीय व्यापारी नाविकों द्वारा क्रिकेट भारत में लाया गया और 1721 में भारत ने अनाधिकृत रूप से क्रिकेट खेलना शुरू किया । 1792 में कलकत्ता क्रिकेट क्लब (जिसे हम आज CC & FC के नाम से जानते हैं) की स्थापना हुई, वास्तव में यह MCC (1787) के बाद दुनिया का दूसरा सबसे पुराना क्रिकेट क्लब है।हालाँकि, एक और क्रिकेट क्लब का गठन 1799 में दक्षिण भारत के सेरिंगपटम में किया गया था। 3 मार्च 1845 को भारतीय सिपाही क्रिकेटरों ने आज के बंग्लादेश स्थित सिलहट में यूरोपीय क्रिकेटरों के साथ खेला था। 1848 में पहले भारतीय क्लब को पारसी ओरिएंटल क्रिकेट क्लब के रूप में नामित किया गया और पहला मैच बॉम्बे में आयोजित किया गया था। वर्ष 1864 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत हुई और पहला मैच मद्रास और कलकत्ता टीम के बीच आयोजित किया गया था। इसके बाद 26 और 28 जनवरी 1893 को लॉर्ड हॉक के नेतृत्व वाली अंग्रेज़ी टीम और ऑल इंडिया टीम के बीच 4 फर्स्ट क्लास मैच खेले गए। इसके बाद ऑल इंडिया टीम 1911 में पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह के नेतृत्व में इंग्लैंड दौरे पर गई थी। 1926 में ए.ई.आर गिलीगन के नेतृत्व में MCC की टीम ने भारत का दौरा किया हालाँकि यह एक अनौपचारिक दौर था लेकिन इस दौरे के दौरान खेले गए मैचों में भारतीय लोगो में काफी उत्सुकता देखी गयी।भारत के महान क्रिकेटर सी के नायडु ने उस टूर पर बेहतरीन खेल दिखाते हुए शतक जमाया था। भारत क्रिकेट बोर्ड की शुरूआत 1928 में हो चुकी थी,1932 में उन्हें आधिकारिक टेस्ट का दर्जा हासिल हुआ,जबकि भारत ने अपना पहला अन्तराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट मैच 25 जून से 28 जून तक इंग्लैंड के विरुद्ध लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेला
रणजी ट्रॉफी की शुरुआत
कई भारतीय राजाओं के प्रयासों के बाद रणजी ट्रॉफी की शुरूआत 1935 में हुई थी और ये टूर्नामेंट आज भी खेला जाता है। नवानगर के राजा रंजीत सिंह जो पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए थे, ने वहां जाकर क्रिकेट में अच्छा नाम बना लिया था। राजा रंजीत सिंह को फॉदर ऑफ इंडियन क्रिकेट कहा जाता है। हालांकि उन्होंने भारत के लिए कभी क्रिकेट नहीं खेला और वे ताउम्र इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेलते रहे। 19 वीं शताब्दी का मध्य और अंतिम हिस्सा भारत की क्रिकेट में बढ़ती लोकप्रियता की गाथा कहता है।
अंतराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत
- अपने पहले के 50 वर्षों में टीम ने बहुत ही कमजोर प्रदर्शन किया, 196 टेस्ट मैचों में से केवल 35 मैच में ही जीत दर्ज करा पाई। भारतीय टीम के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसे वो याद नहीं करना चाहेगी। भारत दुनिया की इकलौती ऐसी टीम है जिसने किसी टेस्ट मैच में एक ही दिन में दो बार ऑल आउट होने का अनचाहा रिकॉर्ड बनाया था।
- आजादी के बाद भारत ने पाकिस्तान को पहली बार 1952 में मात दी थी। इस सीरीज में पाली उमरीगर, विजय मांजरेकर और लेग स्पिनर एस एम गुप्ते ने शानदार प्रदर्शन किया था।
- 60 के दशक में भारत ने घरेलू जमीन के साथ साथ विदेशों में भी बेहतर खेल दिखाना शुरू किया था। इस दौर में ई प्रसन्ना, मंसूर अली खां पटौदी, दिलीप सरदेसाई, हनुमंत सिंह और चंदू बोर्डे जैसे खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
- 70 के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम में स्पिनरों का बोलबाला रहा। बिशन सिंह बेदी, ईरापली प्रसन्ना, वेंकटराघवन और चंद्रशेखर जैसे फिरकी के जादूगरों ने विपक्षी खिलाड़ियों पर दबदबा बनाए रखा। इसी दौर में भारत के दो सबसे महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर और गुंडप्पा विश्वनाथ ने विश्व क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी से लोहा मनवाया।
- 80 का दशक भारतीय क्रिकेट के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। 1983 में भारत ने दुनिया की सबसे खतरनाक टीमों में शुमार वेस्टइंडीज को हराते हु देश में क्रिकेट की लोकप्रियता को बेतहाशा बल मिला था। इस दौर में भारत ने दुनिया को मोहम्मद अजहरूद्दीन, दिलीप वेंगसरकर जैसे बल्लेबाज और रवि शास्त्री जैसे ऑलराउंडर दिए।
- इसी दशक में भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने 34 शतक बनाए जो विश्व क्रिकेट में रिकॉर्ड था। कपिल देव ने भी इस दौर में टेस्ट क्रिकेट में न्यूजीलैंड के रिचर्ड हैडली के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 434 विकेट लिए थे। इससे पहले ये रिकॉर्ड रखने वाले हैडली ने अपने जीवन में 431 टेस्ट विकेट लिए थे।
महान सचिन तेंदुलकर की एंट्री
- 1989 और 1990 में सचिन तेंदुलकर और अनिल कुंबले को शामिल करने के बाद भारतीय टीम को काफी मजबूती मिली थी। उसके अगले साल ही भारतीय टीम में अमर सिंह के बाद सबसे तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ ने भारतीय क्रिकेट में अपना पर्दापण किया था।
- 90 के दशक के आखिरी दौर तक सचिन हर घर में अपनी पहचान बना चुके थे। भारत में टीवी के केबल टीवी के आगमन के बाद लाखों की संख्या में लोग टीवी पर मैच दिखने लगे और सचिन अपनी दिलकश बल्लेबाजी से लोगों के दिलों पर राज करते रहे। 90 में ही सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और वीरेंद्र सहवाग जैसे खिलाड़ियों ने क्रिकेट में अपनी पारी की शुरूआत की थी। ये सभी खिलाड़ी आगे चलकर मॉर्डन क्रिकेट के इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों की लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवा गए।
गांगुली की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट चरम पर
- 27 नवंबर 2000 को भारतीय क्रिकेटर अजहरुद्दीन को फिक्सिंग के आरोपों में दोषी पाया गया जबकि अजय जडेजा, मनोज प्रभाकर, अजय शर्मा और भारतीय टीम के पूर्व फीजीयो अली इरानी के संबंध सट्टेबाजों से होने की भी पुष्टि की गई थी।
- अजहरूद्दीन पर बैन लगने के बाद बंगाल के सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट की कमान संभाली। ये देखना दिलचस्प था कि मैच फिक्सिंग और खराब प्रदर्शन के दौर से गुजर रही भारतीय क्रिकेट टीम को गांगुली किस दिशा में लेकर जाते हैं।
- कप्तान गांगुली ने इसे चुनौती के तौर पर स्वीकार किया और वे अनुभवी और युवा क्रिकेटरों के कॉकटेल से भारत को चौंकाने वाले परिणाम देने लगे। गांगुली के ही नेतृत्व में युवराज सिंह, जहीर खान, हरभजन सिंह, वीरेंद्र सहवाग, मोहम्मद कैफ और एम एस धोनी जैसे खिलाड़ी अपने नायाब प्रदर्शन से टीम में अपनी जगह बनाई।
- गांगुली आक्रामकता और सूझबूझ के साथ अपने विरोधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने लगे। 2001 में जब 14 टेस्ट मैच जीतकर ऑस्ट्रेलिया भारत का दौरा करने पहुंची तो गांगुली ने कप्तान स्टीव वॉ को टॉस के टाइम पर इंतजार करवा कर अपने तेवरों से परिचित करा दिया था। इसी सीरीज का दूसरा यानि कोलकाता टेस्ट मैच इतिहास के सबसे बेहतरीन मैचों में शुमार है
- जब खेला गया सदी का सबसे बेहतरीन टेस्ट मैच (कोलकाता, 2001)
भारत के मध्यमक्रम के बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण, राहुल द्रविड़ और हरभजन सिंह के करिश्माई प्रदर्शन ने इस मैच को क्रिकेट के इतिहास का सबसे बेहतरीन मैच बना दिया था। भारत पहला मैच हारने के बावजूद धमाकेदार तरीके से सीरीज 2-1 से जीतने में कामयाब रहा था। गांगुली अपने तेवरों के साथ क्रिकेट की दुनिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने लगे थे।
- 2002 में इंग्लैंड में हुई त्रिकोणीय सीरीज में भारत और इंग्लैंड आमने सामने थे। भारत ने इस ऐतिहासिक मैच में 300 से ऊपर का लक्ष्य पहली बार हासिल कर नैटवैस्ट सीरीज अपने नाम की थी। इस जीत के हीरो रहे युवा मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह थे। रोमांचक मुकाबले में भारत ने एक विकेट से जीत हासिल की थी। यही वह दौर था जब भारत लक्ष्य का पीछा करने में महारथ करने की शुरूआत कर चुका था। इसके अलावा युवा कैफ और युवराज टीम में अपनी जबरदस्त चपलता से फील्डिंग के स्तर को ऊपर ले जा रहे थे।
- 2002- 2003 भारत ऑस्ट्रेलिया सीरीज – भारत ने भले ही 2001 में कंगारूओं को धूल चटाई थी लेकिन उस जमाने में ऑस्ट्रेलिया को उन्हीं की धरती पर हराना नामुमकिन माना जाता था। ऑस्ट्रेलिया का दबदबा ऐसा था कि केवल दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर कोई भी टीम उनके सामने नहीं टिकती थी। भारत इससे पहले 1999 में ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर सचिन की कप्तानी में शर्मनाक तरीके से घुटने टेक चुका था।
- लेकिन ये दौरा भारत के लिए ऐतिहासिक रहा। भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सीरीज को 1-1 से ड्रा किया और भारतीय टीम ने इस दौरे पर कई रिकॉर्ड तोड़े। ब्रिसबेन में खेले गए पहले ही टेस्ट में कप्तान गांगुली ने सैंकड़ा जड़ते हुए 144 की पारी खेलकर मैच ड्रा कराया। भारत ने दूसरे यानि एडीलेड में इतिहास रचते हुए जीत दर्ज की। जीत के सूत्रधार थे भरोसेमंद राहुल द्रविड और अजीत अगरकर। तीसरा मैच ऑस्ट्रेलिया ने जीता तो चौथा मैच भारत काफी दबाव बनाने के बावजूद ड्रा ही करा सका। इसी मैच में सचिन ने अपने टेस्टकरियर का सर्वाधिक स्कोर (248 नाबाद) बनाया।
- इसके बाद भारत ने 2004 में पाकिस्तान टीम का लंबे अर्से बाद दौरा किया। सीमा पर आतंकवाद के चलते भारत और पाकिस्तान के बीच 15 सालों बाद किसी क्रिकेट सीरीज का आयोजन हो रहा था। भारत ने वन डे और टेस्ट दोनों ही सीरीज अपने नाम की थी। इस दौरे पर जहां इरफान पठान ने अपनी स्विंग गेंदबाजी से पाक के महान गेंदबाज वसीम अकरम की यादें ताजा कराई और बेहतरीन हैट्रिक जमाई थी। हालांकि वक्त के साथ साथ वे एक साधारण गेंदबाज में तब्दील होते चले गए।
- इसी दौरे पर भारत के सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग मुल्तान के सुल्तान के तौर पर उभरे। सहवाग ने मुल्तान में भारत के लिए तिहरा शतक ठोंका और वे ऐसा करने वाले भारत के पहले बल्लेबाज बने। टेस्ट और वन डे में एक समान आक्रामकता वाले सहवाग से गेंदबाज टेस्ट क्रिकेट में भी खौफ खाने लगे। सहवाग की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी मॉर्डन क्रिकेट में बल्लेबाजों के दबदबे का गवाह थी। नजफगढ़ का यह नवाब अपने खालिस अंदाज से क्रिकेट का रूप बदलने की शुरूआत कर चुका था।
- 2000-2005 तक भारत के कोच रहे जान राइट और गांगुली का तालमेल टीम इंडिया के लिए नए इतिहास रचने लगा। भारत ने 2003 विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई। कई विदेशी दौरों पर जीत दर्ज की और गांगुली को भारत के सबसे महान कप्तानों की लिस्ट में शुमार किया जाने लगा। लेकिन राइट के बाद आए ग्रेग चैपल ने भारतीय क्रिकेट में भूचाल ला दिया। गांगुली ने काफी विवादों के बाद आखिरकार कप्तानी छोड़ दी और टीम की कमान अब अनुभवी राहुल द्रविड़ के हाथों में थी।
- द्रविड़ ने भारत के घरेलू और विदेशी धरती पर अच्छे प्रदर्शन को बनाए रखा। लेकिन 2007 में भारत के विश्व कप से बाहर होने के बाद द्रविड़ ने कप्तानी से इस्तीफा दे दिया और सहवाग कप्तानी के बड़े दावेदार के रूप में सामने आए।
- द्रविड़ ने जब कप्तानी छोड़ी तो धोनी को कप्तानी मिलते ही सभी चौक गए थे क्योंकि धोनी अभी नए थे और टीम में उनसे काफी सीनियर युवराज ,सहवाग जैसे खिलाड़ी मौजूद थे लेकिन धोनी अपनी कप्तानी पर खरे उतरे 2007 टी विश्व कप में नायाब धोनी ने टी 20 के पहले ही टूर्नामेंट में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए भारत को कप जीता दिया और वहीं से सहवाग का कप्तान बनने का सपना चूर हो गया।
- धोनी ने इसके बाद एक से एक कीर्तमान रचे भारत को टेस्ट में पहली बार नंबर 1 पर पहुँचाया
- भारतीय क्रिकेट टीम 28 साल बाद वनडे वर्ल्ड कप विजेता बनी... और प्रशंसक जश्न में डूब गए. मास्टर बलास्टर सचिन तेंदुलकर का सपना अब पूरा हो चुका था पूरी टीम ने उन्हें कंधो पर उठाया और स्टेडियम में घुमाया
धोनी इसके बाद भारत को एक के बाद एक खिताब जिताने लगे। धोनी की गिनती महानतम कप्तानों में होने लगी। धोनी भारत को विश्व कप, टी 20 विश्व कप, चैंपियन ट्रॉफी ,ऑस्ट्रेलिया में वन डे सीरीज जैसे खिताबों से भारत की झोली भर चुके थे। भारत का सुनहरा दौर अब अपने चरम पर था।
विराट कोहली को कप्तानी
- धोनी ने 2014 ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर टेस्ट से कप्तानी छोड़ दी थी। इसके बाद कोहली को नेतृत्व सौंपा गया था। उनकी कप्तानी में भारत ने अपने घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीमों को हराया। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका में 1-2 और इंग्लैंड में 1-4 से सीरीज में हार मिली थी। विराट की कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया में 2-1 से टेस्ट सीरीज अपने नाम की थी। दोनों देशों के बीच 71 साल के टेस्ट इतिहास में भारत की ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर पहली सीरीज जीत थी।
- विराट भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान है ,उनकी कप्तानी में भारत ने 48 टेस्ट में 28 में जीत करते ही धोनी का रिकॉर्ड तोड़ा
- विराट भारतीय टीम को निरंतर आगे बढ़ाते जा रहे है इसके साथ ही टीम में रोहित शर्मा, शिखर धवन,के.एल राहुल ,रविन्द्र जडेजा,अश्विन ,बुमराह जैसे युवा खिलाड़ी टीम में लगातार अपनी भूमिका निभाते रहते है















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