ऑफ स्पिन गेंदबाजी
अक्सर जब एक दाएं हाथ का गेंदबाज( जिसे राइट
आर्म ऑफब्रेक कहते है ) जब दाएं हाथ के बैट्समैन को गेंद डालता है तो गेंद पिच पर पड़ने के बाद लेग स्टंप की तरफ टर्न होती है उसी प्रकार जब एक बाएं हाथ का गेंदबाज (जिसे लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स कहते है) जब दाये हाथ के बैट्समैन को गेंद डालता है तो गेंद पड़ने के बाद ऑफ स्टंप की तरफ टर्न होती है,
दूसरा एक नई प्रकार की गेंद है जिसमे भी एक राइट आर्म ऑफ ब्रेक बॉलर अपनी उंगलियों का अलग तरीके से इस्तेमाल करके गेंद को टप्पे के बाद (एक राइट हैंडेड बैट्समैन को) ऑफ स्टंप की तरफ टर्न करा सकता है। यदि किसी ऑफ स्पिनर को ये बॉल भी फेंकनी आ गयी तो बैट्समैन कंफ्यूज हो जाता है कि बॉलर कौनसी गेंद फेंकने वाला है क्योकि इन दोनों स्थितियों में गेंदबाज का एक्शन समान रहता है ,इससे विकेट मिलने के ज्यादा चांस मिल जाते है।
'दूसरा' की खोज
आमतौर पर क्रिकेट जगत पूर्व पाकिस्तानी ऑफ स्पिनर सकलैन मुश्ताक को ‘दूसरा' का जनक मानता है। इस गेंद के नामकरण का श्रेय पाकिस्तान के पूर्व विकेटकीपर मोइन खान को दिया जाता है, जो विकेट के पीछे से मुश्ताक को "दूसरा" डालने के लिए कहते थे जिसका मतलब था दूसरी प्रकार की गेंद डालना। इन मैचों में से एक में कमेंट्री करने वाले टोनी ग्रेग अंततः इस शब्द को उस गेंद के साथ जोड़ने में सफल रहे।
हालांकि कुछ लोगों के अनुसार दूसरा की वास्तविक शुरुआत 1950 के दशक में वेस्टइंडीज की तरफ से खेलने वाले सौनी रामादीन द्वारा की गयी थी, क्योंकि एक ऑफ-ब्रेक गेंदबाज की तरह गेंद को पकड़ने के बावजूद वे गेंद को दोनों तरफ घुमाते थे और दूसरा डालने वाले कई ऑफ-ब्रेक गेंदबाजों की ही तरह उनका भी गेंदबाजी एक्शन संदिग्ध था।
'दूसरा' गेंद डालने वाले कुछ खिलाड़ी
सकलैन मुश्ताक के बाद जिसने भी 'दूसरा' डाला सभी पर थ्रो गेंद फेंकने का आरोप लग चुका है, हालांकि अधिकांश मामलों में इसे खारिज किया गया है।श्रीलंका के महान ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन,पाकिस्तान के सईद अजमल, हरभजन सिंह, शोएब मलिक, जोहान बोथा इन सभी पर गलत एक्शन का आरोप लगा है।
सईद अजमल के गेंदबाजी एक्शन को गैरकानूनी करार देने पर उनपे प्रतिबंध लगा दिया गया था उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 2012 में तीन टेस्ट मैचों में 24 विकेट लेकर सबको चौंका दिया था हालांकि उन्होंने अलग एक्शन के साथ वापसी की थी लेकिन वो पहले जैसे गेंदबाजी नही कर पाए उन्होंने बांग्लादेश में 2 वन डे और एक टी ट्वेंटी में केवल एक विकेट लिया उसके बाद वो कभी राष्ट्रीय टीम में वापसी नही कर पाए और अंततः 2017 में क्रिकेट को अलविदा कह दिया ।




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Badiya rawat g
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