पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प हुई जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे, तब से भारत में चाइनीज कंपनियों का लगातार विरोध हो रहा है,ऐसे में खेल जगत भी सचेत हो गया है जिसमे आईपीएल 2020 मुख्य है। आपको बता दे कि IPL की टाइटल स्पॉन्सर शिप एक चाइनीस कंपनी के पास है जिसका नाम वीवो(VIVO) है,साथ ही BCCI के साथ भी कईं चाइनीस कंपनियों की स्पॉन्सरशिप है। आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सर विवो(VIVO) बोर्ड को हर साल 440 करोड़ रुपये देती है, इसका यह करार 5 साल का है जो 2022 में खत्म होगा। 
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क्या BCCI तोड़ेगा चीनी कंपनियों से नाता?
BCCI ने शुक्रवार 19 जून को एक ट्वीट करते हुए लिखा है कि 'सीमा पर हुई झड़प में, हमारे बहादुर जवानों की शहादत को ध्यान में रखते हुए IPL गवर्निंग काउंसिल ने IPL के विभिन्न स्पॉन्सरशिप डील्स की समीक्षा के लिए अगले हफ्ते एक बैठक बुलाई है।

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हालांकि इससे पहले BCCI के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने कहा था कि फिलहाल BCCI चीनी कंपनी से करार नही तोड़ेगा उन्होंने कहा कि ' जज्बाती तौर पर बात करने से तर्क पीछे रह जाता है ,हमे समझना होगा कि हम चीन के हित के लिए चीनी कंपनी के सहयोग की बात कर रहे है या भारत के हित के लिए चीनी कंपनी से मदद ले रहे है , आगे उन्होंने कहा कि जब चीनी कंपनी भारत में अपना उत्पाद बेचती है तो उसमें से कुछ हिस्सा BCCI को ब्रांड प्रचार के लिए देती है और बोर्ड भारत सरकार को 42% टैक्स दे रहा है इसमें भारत का फायदा हो रहा है चीन का नही , उन्होंने कहा कि अगर सरकार चीनी कंपनी पर बैन लगाती है तो बीसीसीआई को इसका पालन करने में खुशी होगी अनुबंध समाप्त होने पर बीसीसीआई आगे से इसका ध्यान रखेगी और लोगों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाएगी,